उजाला / उत्तरप्रदेश
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के रहीमाबाद क्षेत्र स्थित उमरावल डाकघर से लाखों रुपये की कथित वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। डाकघर में जमा रकम गायब होने की शिकायतों के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है। यहां करीब 36 गांवों के लोग बचत खाता, सुकन्या समृद्धि योजना, रिकरिंग डिपॉजिट (आरडी) और फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) समेत कई योजनाओं के तहत अपने खाते संचालित कराते हैं। मामले की जानकारी मिलने के बाद खाताधारकों में नाराजगी फैल गई और उन्होंने डाकघर पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया। मामला सामने आने के बाद संबंधित अधिकारियों ने डाकघर के ब्रांच पोस्ट मास्टर (बीपीएम) प्रमोद को वहां से हटा दिया है। फिलहाल मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
खातों से रकम गायब होने की शिकायत, डाकघर पहुंचे ग्रामीण
उमरावल डाकघर में कथित घोटाले की जानकारी मिलने के बाद बड़ी संख्या में खाताधारक अपनी जमा रकम के बारे में जानकारी लेने पहुंचे। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने लंबे समय से अपनी मेहनत की कमाई डाकघर की विभिन्न बचत योजनाओं में जमा की थी, लेकिन अब उन्हें अपने ही पैसे के लिए परेशान होना पड़ रहा है। खाताधारकों के मुताबिक, जब उन्होंने डाकघर पहुंचकर अपनी रकम से जुड़ी शिकायत की तो वहां मौजूद कर्मचारियों ने उनकी पासबुक की प्रतियां जमा करा लीं। साथ ही, उन्हें आश्वासन दिया गया कि दो से तीन दिन के भीतर उनके खातों में रुपये वापस आ जाएंगे। हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि कई दिन बीत जाने के बावजूद उनकी रकम वापस नहीं आई।
इसके बाद खाताधारकों ने डाकघर में तैनात बीपीएम प्रमोद से संपर्क कर अपनी जमा रकम लौटाने की मांग की। आरोप है कि उनकी शिकायत पर संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद ग्रामीणों ने उच्च अधिकारियों से शिकायत की, जिसके बाद मामले की जांच शुरू हुई।

विरोध के दौरान कर्मचारियों पर काम बंद कर जाने का आरोप
गुरुवार दोपहर खाताधारकों का गुस्सा उस समय बढ़ गया, जब वे अपनी शिकायत लेकर डाकघर पहुंचे। ग्रामीणों ने वहां जमकर नारेबाजी की और अपनी जमा रकम वापस दिलाने की मांग उठाई। खाताधारकों का आरोप है कि विरोध और शिकायतों के बीच डाकघर के कर्मचारियों ने दोपहर करीब तीन बजे ही कामकाज बंद कर दिया और वहां से चले गए। ग्रामीणों ने डाकघर के नियमित समय पर नहीं खुलने और दोपहर दो से तीन बजे के बीच ही बंद हो जाने की भी शिकायत की है। उनका कहना है कि यदि डाकघर में समय पर कामकाज नहीं होगा और खातों से जुड़ी समस्याओं का समाधान नहीं मिलेगा, तो दूरदराज के गांवों से आने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। इस मामले में डाकघर में मौजूद कर्मचारियों से जानकारी लेने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने कुछ भी बताने से इनकार कर दिया। ऐसे में कथित वित्तीय अनियमितता से जुड़े कई सवालों के जवाब अभी सामने आने बाकी हैं।
बीपीएम को हटाया गया, जांच शुरू
मामले की शिकायत उच्च अधिकारियों तक पहुंचने के बाद उमरावल डाकघर के बीपीएम प्रमोद को वहां से हटा दिया गया है। इसके साथ ही पूरे प्रकरण की जांच शुरू कर दी गई है। अब जांच के जरिए यह पता लगाने की जरूरत है कि खाताधारकों की जमा रकम में कितनी राशि का अंतर है, किन खातों में गड़बड़ी की शिकायत है और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। जांच में खातों के रिकॉर्ड, जमा पर्चियों, पासबुक की प्रविष्टियों और संबंधित लेनदेन का मिलान महत्वपूर्ण होगा। हालांकि, अभी तक कथित घोटाले की कुल रकम, प्रभावित खाताधारकों की वास्तविक संख्या और अनियमितता की प्रकृति को लेकर कोई आधिकारिक आंकड़ा सामने नहीं आया है।

बैंक की दूरी बनी ग्रामीणों की परेशानी की वजह
उमरावल गांव की भौगोलिक स्थिति भी इस मामले को गंभीर बनाती है। जानकारी के मुताबिक, गांव से करीब 500 मीटर पश्चिम में हरदोई जिले की सीमा शुरू हो जाती है। वहीं, उमरावल से लगभग 10 किलोमीटर के दायरे में कोई बड़ा बैंक नहीं है। ऐसे में आसपास के पिछड़े और ग्रामीण इलाकों के लोगों के लिए डाकघर बचत और छोटी रकम जमा करने का प्रमुख माध्यम बना हुआ है। ग्रामीण परिवार अपनी दैनिक कमाई में से बचत करके डाकघर की योजनाओं में पैसा जमा करते हैं। सुकन्या समृद्धि योजना में बेटियों के भविष्य के लिए रकम जमा की जाती है, जबकि आरडी और एफडी जैसी योजनाएं भविष्य की जरूरतों के लिए बचत का साधन हैं। ऐसे में जमा रकम से जुड़ी अनिश्चितता खाताधारकों के लिए आर्थिक और मानसिक परेशानी का कारण बन रही है।
खाताधारकों को रकम वापसी का इंतजार
उमरावल डाकघर का यह मामला ग्रामीण बचत व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की जरूरत को रेखांकित करता है। खाताधारकों को उम्मीद है कि जांच जल्द पूरी होगी, उनकी शिकायतों का निष्पक्ष निस्तारण किया जाएगा और यदि किसी की जमा रकम में गड़बड़ी पाई जाती है तो नियमानुसार उसे वापस दिलाने की कार्रवाई होगी। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि खाताधारकों की जमा रकम का वास्तविक हिसाब क्या है और उनकी शिकायतों का समाधान कब तक होगा। अब सबकी नजर जांच रिपोर्ट और डाक विभाग की आगे की कार्रवाई पर टिकी है।
