हर की पैड़ी पर गंगा जल का संकट, 18 दिन तक प्रभावित रहेंगे श्रद्धालु

HARIDWAR

उजाला / उत्तराखंड

हरिद्वार। उत्तराखंड के हरिद्वार में स्थित विश्व प्रसिद्ध हर की पैड़ी पर गंगा स्नान और धार्मिक अनुष्ठान के लिए पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को अगले 18 दिनों तक परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ऊपरी गंगनहर को वार्षिक मरम्मत और रखरखाव के लिए मंगलवार देर रात से बंद कर दिया गया है। नहर बंद होने के कारण हर की पैड़ी पर गंगा जल की उपलब्धता प्रभावित हुई है। ऐसे में देश के अलग-अलग हिस्सों से हरिद्वार पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की आस्था के साथ-साथ स्थानीय व्यापारियों की चिंता भी बढ़ गई है।

हर की पैड़ी को हरिद्वार के सबसे पवित्र धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगा स्नान, पूजा-पाठ, पिंडदान और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों के लिए पहुंचते हैं। गंगा के जल का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व होने के कारण यहां पानी की कमी श्रद्धालुओं के लिए निराशाजनक स्थिति पैदा कर रही है। बताया जा रहा है कि गंगा का जलस्तर और उपलब्धता सामान्य होने में लगभग 18 दिन लग सकते हैं।

वार्षिक मरम्मत के लिए बंद की गई ऊपरी गंगनहर

उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, गंगा बंदी हर साल होने वाली नियमित प्रक्रिया है। इसका मुख्य उद्देश्य नहर प्रणाली की जांच करना, क्षतिग्रस्त हिस्सों की पहचान करना और आवश्यक मरम्मत के काम को पूरा करना है। साल भर पानी बहने के कारण नहर के कई हिस्सों का निरीक्षण करना मुश्किल होता है। पानी बंद होने पर ही नहर की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जा सकता है और मरम्मत की जरूरत वाले हिस्सों को ठीक किया जाता है। उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता विकास त्यागी ने बताया कि यह एक नियमित रखरखाव प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि नहर प्रणाली केवल सिंचाई तक सीमित नहीं है, बल्कि दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में पेयजल की आपूर्ति और विभिन्न औद्योगिक एवं ऊर्जा परियोजनाओं के संचालन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

नहर प्रणाली से जुड़े जलविद्युत संयंत्रों और एनटीपीसी दादरी जैसे ताप विद्युत संयंत्रों के लिए भी पानी की उपलब्धता महत्वपूर्ण है। इसी वजह से नहरों की समय-समय पर जांच और मरम्मत जरूरी मानी जाती है।

श्रद्धालुओं को निराशा, धार्मिक अनुष्ठानों पर असर

हर की पैड़ी पर गंगा जल की कमी का सीधा असर यहां आने वाले श्रद्धालुओं पर पड़ रहा है। कई श्रद्धालु विशेष रूप से गंगा स्नान और धार्मिक कार्यों के लिए हरिद्वार पहुंचते हैं। ऐसे में गंगा का पर्याप्त जल उपलब्ध नहीं होने से उनकी धार्मिक योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं। स्थानीय पुजारियों का कहना है कि पानी की कमी के कारण पूजा-पाठ और दूसरे धार्मिक अनुष्ठानों में भी परेशानी हो रही है। हर की पैड़ी पर गंगा की उपस्थिति धार्मिक परंपराओं का अहम हिस्सा है, इसलिए जल की उपलब्धता को लेकर श्रद्धालुओं की अपेक्षाएं काफी अधिक रहती हैं।

हालांकि, अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि श्रद्धालुओं के स्नान आदि के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी। ऐसे में प्रशासन और संबंधित विभागों के सामने चुनौती है कि मरम्मत का काम भी समय पर पूरा हो और धार्मिक गतिविधियों के लिए आवश्यक जल की उपलब्धता भी बनी रहे।

स्थानीय व्यापारियों को आर्थिक नुकसान की आशंका

हरिद्वार की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा धार्मिक पर्यटन पर निर्भर है। हर की पैड़ी और आसपास के क्षेत्रों में पूजा सामग्री, फूल-माला, प्रसाद, धार्मिक वस्तुओं और खानपान से जुड़े कारोबार बड़ी संख्या में चलते हैं। गंगा स्नान के लिए आने वाले श्रद्धालु इन कारोबारों की आय का महत्वपूर्ण स्रोत हैं। गंगा जल की कमी के कारण श्रद्धालुओं की संख्या, उनके ठहरने की अवधि और स्थानीय बाजारों में खरीदारी पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। कुछ व्यापारियों ने पानी पूरी तरह बंद किए जाने पर आपत्ति जताई है। उनका मानना है कि ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे मरम्मत का काम भी चलता रहे और धार्मिक पर्यटन से जुड़े कारोबार को भी कम से कम नुकसान हो।

कुंभ परियोजनाओं के बीच मरम्मत का काम

अधिशासी अभियंता विकास त्यागी के अनुसार, कुंभ मेले से संबंधित परियोजनाओं पर भी अलग-अलग स्थानों पर काम चल रहा है। इस दौरान मरम्मत और अन्य कार्यों को ध्यान में रखते हुए विशेष योजना बनाई गई है। कुछ परियोजनाएं उत्तराखंड सरकार के स्तर पर संचालित हो रही हैं। उन्होंने ग्रीन कॉरिडोर परियोजना का भी उल्लेख किया, लेकिन स्पष्ट किया कि इसका गंगा बंदी से सीधा संबंध नहीं है। फिलहाल, ऊपरी गंगनहर की वार्षिक बंदी के कारण हर की पैड़ी पर गंगा जल की उपलब्धता प्रभावित है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि मरम्मत का काम निर्धारित समय में पूरा हो और श्रद्धालुओं को जल्द सामान्य परिस्थितियों में गंगा स्नान की सुविधा मिल सके।

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