कोलकाता दुर्गा पूजा पंडाल भगदड़ 19 की मौत के बाद बोबाजार में धारा 163 लागू,

KOLKATA

उजाला / बंगाल

कोलकाता, पश्चिम बंगाल। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में दुर्गा पूजा के उत्सवी माहौल के बीच एक दर्दनाक हादसे ने पूरे शहर को झकझोर दिया है। उत्तर कोलकाता के चोरबागान सर्वजनिक दुर्गा पूजा पंडाल में शनिवार, 17 अक्टूबर की शाम भगदड़ मचने से कम से कम 19 लोगों की मौत हो गई, जबकि 25 लोग घायल हो गए। हादसे के बाद पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। बोबाजार इलाके के कुछ हिस्सों में 18 से 20 अक्टूबर तक निषेधाज्ञा लागू की गई है। पुलिस ने मामले में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

भगदड़ के बाद बोबाजार में धारा 163 लागू

हादसे के बाद कानून-व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी अप्रिय स्थिति को रोकने के लिए कोलकाता पुलिस ने बोबाजार थाना क्षेत्र के कुछ हिस्सों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत प्रतिबंध लगाए हैं। पुलिस कमिश्नर अजय नंद के आदेश के मुताबिक, ये प्रतिबंध 18 अक्टूबर से 20 अक्टूबर तक प्रभावी रहेंगे। निषेधाज्ञा के तहत संबंधित क्षेत्रों में पांच या उससे अधिक लोगों के गैरकानूनी जमावड़े, लाठी अथवा खतरनाक हथियार लेकर चलने और शांति भंग करने वाली गतिविधियों पर रोक लगाई गई है। प्रशासन का उद्देश्य दुर्घटना के बाद संवेदनशील इलाके में शांति बनाए रखना और भीड़ को नियंत्रित करना है।

बारिश के बीच बढ़ी भीड़, कुछ ही देर में मची अफरा-तफरी

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, हादसा शनिवार शाम करीब 7:30 बजे हुआ। उस समय दुर्गा पूजा पंडाल में दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे। इसी दौरान तेज बारिश शुरू हो गई। बारिश से बचने के लिए बाहर मौजूद लोग तेजी से पंडाल की ओर बढ़ने लगे। अचानक बढ़े भीड़ के दबाव के कारण स्थिति बिगड़ गई और कई लोग गिरने लगे। बताया जा रहा है कि पंडाल के आसपास की संकरी गलियों और भीड़ को नियंत्रित करने में संभावित चूक ने हालात को और गंभीर बना दिया। शुरुआती जानकारियों में निजी सुरक्षा एजेंसी की ओर से की गई घोषणा और सीटी बजाए जाने को भी संभावित कारणों में शामिल किया गया है। हालांकि, इन परिस्थितियों की वास्तविक भूमिका जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

आयोजकों के खिलाफ FIR, 14 लोगों से पूछताछ

चोरबागान भगदड़ मामले में कोलकाता पुलिस ने आयोजकों और अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ स्वतः संज्ञान लेते हुए FIR दर्ज की है। यह मामला गिरिश पार्क थाना क्षेत्र में दर्ज किया गया है। प्राथमिकी में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 105, 110 और 3(5) लगाई गई हैं।पुलिस ने शुरुआती कार्रवाई के दौरान 14 लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की। इनमें पूजा समिति से जुड़े लोगों और निजी सुरक्षा व्यवस्था से संबंधित कर्मियों के शामिल होने की जानकारी सामने आई। बाद की मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, मामले में सात लोगों की गिरफ्तारी भी की गई। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा इंतजाम और आपातकालीन व्यवस्था में कहां चूक हुई।

प्रशासन की जांच में किन पहलुओं पर रहेगा जोर?

हादसे की जांच में पुलिस यह समझने की कोशिश कर रही है कि बारिश के दौरान भीड़ अचानक क्यों बढ़ी और लोगों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त इंतजाम थे या नहीं। पंडाल के प्रवेश और निकास मार्ग, सुरक्षा कर्मियों की तैनाती, आयोजकों और पुलिस के बीच समन्वय तथा सार्वजनिक घोषणाओं की भूमिका जैसे पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने घटना की जांच कराने और लापरवाही सामने आने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई का भरोसा दिया है। जांच में उपलब्ध साक्ष्यों और संबंधित लोगों के बयानों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

धार्मिक आयोजनों में भीड़ प्रबंधन पर उठे सवाल

कोलकाता की यह घटना बड़े धार्मिक आयोजनों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। दुर्गा पूजा के दौरान शहर के विभिन्न पंडालों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में प्रवेश और निकास के लिए पर्याप्त रास्ते, भीड़ की आवाजाही की निगरानी, प्रशिक्षित स्वयंसेवक, आपातकालीन चिकित्सा सहायता और खराब मौसम के लिए वैकल्पिक व्यवस्था बेहद जरूरी हो जाती है। चोरबागान हादसे के बाद प्रशासन के सामने तत्काल चुनौती प्रभावित इलाके में शांति बनाए रखने के साथ-साथ घटना के कारणों का पता लगाना और भविष्य में ऐसी त्रासदी रोकने के उपाय सुनिश्चित करना है। फिलहाल, इस हादसे में 19 लोगों की मौत और 25 लोगों के घायल होने की खबर सामने आई है। पुलिस की जांच जारी है और घटना की जिम्मेदारी तय होना बाकी है। हादसे ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी धार्मिक आयोजन की भव्यता से ज्यादा महत्वपूर्ण श्रद्धालुओं की सुरक्षा और जीवन की रक्षा है।

 

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