यूपी चुनाव से पहले BSP का बड़ा दांव! आकाश आनंद संभालेंगे प्रचार की कमान

MAYAWATI

उजाला / उत्तरप्रदेश

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज होने लगी है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी), समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक रणनीतियों के साथ अब बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने भी अपनी तैयारियों को धार देना शुरू कर दिया है। बसपा प्रमुख मायावती ने जहां चुनावी सर्वे को लेकर सवाल उठाए हैं, वहीं पार्टी के नेशनल कोऑर्डिनेटर आकाश आनंद को चुनाव प्रचार की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है। लंबे समय बाद आकाश आनंद उत्तर प्रदेश में जनसभाओं के जरिए पार्टी के प्रचार अभियान को गति देते नजर आएंगे।बसपा की रणनीति को आगामी विधानसभा चुनाव से पहले संगठन को सक्रिय करने, संभावित उम्मीदवारों के समर्थन में माहौल बनाने और पार्टी के परंपरागत वोट बैंक को मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

आकाश आनंद 28 अक्टूबर से करेंगे जनसभाओं की शुरुआत

बसपा ने आकाश आनंद के अगले डेढ़ महीने के प्रचार कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की है। पार्टी प्रमुख मायावती की अनुमति के बाद तय कार्यक्रम के मुताबिक आकाश आनंद 28 अक्टूबर से चुनावी जनसभाओं को संबोधित करना शुरू करेंगे। उनके अभियान की शुरुआत पश्चिमी उत्तर प्रदेश से होगी। पहली जनसभा 28 अक्टूबर को बुलंदशहर जिले के अनूपशहर में प्रस्तावित है। यहां वह बसपा प्रत्याशी मनोज कुमार प्रधान के समर्थन में सभा करेंगे। इसके बाद 2 नवंबर को सहारनपुर जिले के नकुड़ विधानसभा क्षेत्र में जनसभा आयोजित की जाएगी, जहां आकाश आनंद पार्टी उम्मीदवार नरेश कुमार सैनी के समर्थन में लोगों को संबोधित करेंगे। इन दोनों जनसभाओं के समन्वय की जिम्मेदारी पूर्व सांसद मुनकाद अली को दी गई है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश से अभियान की शुरुआत करना बसपा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इस क्षेत्र में जातीय समीकरण, सामाजिक प्रतिनिधित्व और बहुजन राजनीति का चुनावी प्रभाव अहम भूमिका निभा सकता है।

यूपी के साथ पंजाब और उत्तराखंड में भी प्रचार

आकाश आनंद का चुनावी अभियान केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं रहेगा। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार वह अयोध्या, आगरा और कानपुर समेत कई क्षेत्रों में पार्टी के लिए प्रचार करेंगे। 20 नवंबर को अयोध्या जिले के बीकापुर, 22 नवंबर को आगरा और 29 नवंबर को कानपुर के बिल्हौर क्षेत्र में जनसभा करने का कार्यक्रम है। इसके अलावा 26 नवंबर को पंजाब में और 6 दिसंबर को हरिद्वार में बसपा की जनसभा को संबोधित करने की योजना है। इस तरह पार्टी उत्तर प्रदेश के साथ पंजाब और उत्तराखंड में भी अपने संगठन तथा चुनावी गतिविधियों को मजबूत करने पर ध्यान दे रही है। आकाश आनंद को प्रचार अभियान में उतारना बसपा के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि पार्टी युवा नेतृत्व के जरिए नए मतदाताओं तक पहुंच बनाने और अपने राजनीतिक संदेश को व्यापक स्तर पर पहुंचाने की कोशिश कर सकती है।

मायावती ने चुनावी सर्वे पर उठाए सवाल

एक तरफ बसपा ने जनसभाओं के जरिए चुनावी तैयारियां तेज की हैं, तो दूसरी तरफ मायावती ने विधानसभा चुनाव से पहले सामने आ रहे सर्वे को लेकर नाराजगी जताई है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर आरोप लगाया कि जातिवादी मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से बसपा को कमजोर दिखाने के लिए भ्रामक और प्रायोजित सर्वे का प्रचार किया जा रहा है। मायावती के मुताबिक, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी अच्छे और दमदार उम्मीदवारों के चयन के साथ जमीनी स्तर पर तैयारियों में जुटी है। ऐसे समय में बसपा को कमतर आंकने वाले सर्वे सामने आना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव के दौरान बसपा के खिलाफ मिथ्या प्रचार पहले भी होता रहा है और सर्वे में पार्टी की संभावनाओं को कम करके आंका जाता रहा है।

2007 की जीत का उदाहरण देकर कार्यकर्ताओं को दिया संदेश

मायावती ने अपने बयान में 2007 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उस समय भी राजनीतिक अनुमानों के बावजूद बसपा ने पूर्ण बहुमत हासिल कर सरकार बनाई थी। उनके मुताबिक, उस सरकार में कानून का राज स्थापित करने और ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ की नीति के तहत काम करने का प्रयास किया गया था। बसपा प्रमुख ने समाजवादी पार्टी और भाजपा पर निशाना साधते हुए प्रदेश के लोगों, खासकर बहुजन समाज के मतदाताओं से विरोधी दलों के कथित दुष्प्रचार से सावधान रहने की अपील की। उन्होंने कार्यकर्ताओं से पांचवीं बार बसपा की सरकार बनाने के लक्ष्य के साथ पूरी ताकत से जुटने का आह्वान किया।

क्या यूपी में बसपा फिर मजबूत होने की तैयारी में है?

आकाश आनंद की जनसभाओं और मायावती के बयानों से स्पष्ट है कि बसपा आगामी चुनाव से पहले अपनी राजनीतिक सक्रियता बढ़ाना चाहती है। पार्टी के सामने संगठन को मजबूत करने, प्रभावी उम्मीदवार चुनने, मतदाताओं का विश्वास बढ़ाने और चुनावी मुकाबले में अपनी स्थिति बेहतर करने जैसी चुनौतियां हैं। हालांकि, इन प्रयासों का चुनावी परिणाम क्या होगा, यह आने वाले समय में पार्टी की जमीनी सक्रियता, उम्मीदवारों के चयन और मतदाताओं की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा। फिलहाल आकाश आनंद का प्रचार अभियान और मायावती का सर्वे पर हमला यूपी की राजनीति में बसपा की बढ़ती सक्रियता के संकेत दे रहा है।

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