उजाला / देश
नई दिल्ली: केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार, 12 अक्टूबर को कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने पार्टी की लगातार चुनावी हार के लिए उसके दिशाहीन नेतृत्व और आंतरिक गुटबाजी को जिम्मेदार ठहराया। शिवराज ने आरोप लगाया कि कांग्रेस चुनावों में हार का आत्ममंथन करने के बजाय चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाती है। उनका यह बयान चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्ष के विरोध प्रदर्शन के बीच सामने आया है।
कांग्रेस की हार पर शिवराज ने क्या कहा?
दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी के मुख्यालय में मीडिया से बातचीत के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कांग्रेस की चुनावी हार का कारण चुनाव आयोग नहीं, बल्कि पार्टी का अपना दिशाहीन नेतृत्व है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि बार-बार चुनाव हारने के बाद कांग्रेस सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करती है और संस्थाओं को जिम्मेदार ठहराती है। शिवराज ने हिंदी की कहावत ‘नाच न जाने, आंगन टेढ़ा’ का इस्तेमाल करते हुए कांग्रेस नेतृत्व पर निशाना साधा। उनका कहना था कि पार्टी अपनी कमजोरियों को स्वीकार करने और उनमें सुधार करने के बजाय हार का दोष दूसरों पर डाल रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस जनता का विश्वास खोती जा रही है
यूपी और पंजाब में गुटबाजी का किया जिक्र
केंद्रीय मंत्री ने कांग्रेस के भीतर चल रहे संगठनात्मक विवादों का उल्लेख करते हुए कहा कि पार्टी कई राज्यों में नेतृत्व संबंधी समस्याओं से जूझ रही है। उन्होंने उत्तर प्रदेश में नवनियुक्त प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष आराधना मिश्रा ‘मोना’ के पदभार ग्रहण कार्यक्रम के दौरान उनके समर्थकों और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के समर्थकों के बीच हुए विवाद का जिक्र किया। वहीं, पंजाब में प्रदेश अध्यक्ष के बदलाव और पार्टी के भीतर नेताओं के बीच मतभेदों को भी कांग्रेस की मुश्किलों से जोड़कर देखा। शिवराज के मुताबिक, अलग-अलग राज्यों में नेतृत्व को लेकर जारी खींचतान पार्टी की चुनावी संभावनाओं को प्रभावित कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के पास स्पष्ट दिशा और मजबूत नेतृत्व का अभाव है।
चुनाव आयोग और SIR को लेकर क्यों बढ़ा विवाद?
शिवराज सिंह चौहान का यह बयान ऐसे समय आया है, जब कांग्रेस और INDIA गठबंधन के अन्य दल विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहे हैं। विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं और मतदाता सूची के पुनरीक्षण में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग उठा रहे हैं। 12 अक्टूबर को राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी दलों ने दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च करने का प्रयास किया। विपक्ष की मांग है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली की समीक्षा हो। कांग्रेस और विपक्षी दलों ने इस प्रक्रिया को लेकर अपनी आपत्तियां जताई हैं, जबकि भाजपा नेता इन आरोपों को राजनीतिक हताशा से जोड़कर देख रहे हैं।
भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज
चुनाव आयोग की निष्पक्षता, मतदाता सूची के पुनरीक्षण और चुनावी नतीजों को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव लगातार बढ़ रहा है। भाजपा का कहना है कि चुनावी हार के बाद संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाने के बजाय कांग्रेस को अपनी संगठनात्मक कमजोरियों पर ध्यान देना चाहिए। दूसरी ओर, कांग्रेस और उसके सहयोगी दल चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं। शिवराज सिंह चौहान के ताजा बयान ने इस राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। अब देखना होगा कि कांग्रेस इस हमले का क्या जवाब देती है और चुनाव आयोग से जुड़े विवाद पर आगे क्या राजनीतिक घटनाक्रम सामने आते हैं।
