यूपी में अखिलेश यादव का सख्त एक्शन, कन्नौज समेत कई सपा इकाइयां भंग

AKHILESH YADAV

उजाला / उत्तरप्रदेश

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव संगठन को लेकर सख्त नजर आ रहे हैं। लोकसभा चुनाव में मिली सफलता के बाद सपा नेतृत्व अब विधानसभा चुनाव में भी बेहतर प्रदर्शन की रणनीति पर काम कर रहा है। इसके लिए पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को सक्रिय रहने, सोशल मीडिया पर पार्टी का पक्ष मजबूती से रखने और संगठनात्मक जिम्मेदारियों को गंभीरता से निभाने के निर्देश दिए जा रहे हैं। इसी क्रम में पार्टी के भीतर अनुशासन और कार्यकर्ताओं की सक्रियता को लेकर कार्रवाई का सिलसिला तेज हुआ है। पिछले करीब एक महीने के दौरान उत्तर प्रदेश की कन्नौज, गोरखपुर, कासगंज और एटा जिला इकाइयों को भंग किया गया है। वहीं, उत्तराखंड में भी प्रदेश से लेकर जिला, महानगर और नगर स्तर तक की कई संगठनात्मक इकाइयों तथा प्रकोष्ठों को भंग करने का फैसला लिया गया। इन फैसलों को आगामी विधानसभा चुनाव से पहले संगठन में फेरबदल और जवाबदेही तय करने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है।

कन्नौज में पीडीए सम्मेलन के बाद कार्रवाई

समाजवादी पार्टी का मजबूत गढ़ माने जाने वाले कन्नौज में पीडीए सम्मेलन के दौरान अपेक्षित भीड़ नहीं जुटने के बाद जिला संगठन पर कार्रवाई हुई। शनिवार को आयोजित सम्मेलन में खाली कुर्सियों की तस्वीरें सामने आने के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई। योगी सरकार में राज्यमंत्री असीम अरुण और भाजपा के पूर्व सांसद सुब्रत पाठक ने इस मुद्दे पर सपा नेतृत्व को घेरा। इसके बाद अखिलेश यादव के निर्देश पर प्रदेश अध्यक्ष ने कन्नौज के जिलाध्यक्ष समेत पूरी जिला कार्यकारिणी को भंग कर दिया। इस कार्रवाई से पार्टी के अन्य जिला संगठनों को भी स्पष्ट संदेश गया है कि संगठनात्मक कार्यक्रमों में लापरवाही और अपेक्षित जनभागीदारी सुनिश्चित नहीं कर पाने को गंभीरता से लिया जा सकता है।

गोरखपुर में मारपीट के बाद भंग हुईं इकाइयां

गोरखपुर में तीन अक्टूबर को समाजवादी पार्टी की प्रेस वार्ता के दौरान पार्टी नेताओं के बीच विवाद और मारपीट का मामला सामने आया था। शास्त्री चौक स्थित गोरखपुर जर्नलिस्ट प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान वरिष्ठ नेताओं और पदाधिकारियों की मौजूदगी में विवाद बढ़ गया। पूर्व जिलाध्यक्ष नगीना साहनी और पूर्व चेयरमैन अंशुमान सिंह के समर्थकों के बीच कहासुनी के बाद हाथापाई हुई। यह घटना पत्रकारों के कैमरों में भी कैद हो गई। मामला पार्टी नेतृत्व तक पहुंचने के बाद गोरखपुर की जिला और महानगर कार्यकारिणियों को भंग कर दिया गया। इसके साथ ही प्रदेश स्तर के विभिन्न फ्रंटल संगठनों को भंग करने के आदेश भी जारी किए गए। सार्वजनिक मंच पर इस तरह की घटना ने पार्टी के अनुशासन और आंतरिक समन्वय को लेकर सवाल खड़े किए।

कासगंज और एटा में भी नेताओं की भिड़ंत बनी वजह

इससे पहले 19 सितंबर को लखनऊ में अखिलेश यादव की मौजूदगी में कासगंज और एटा के नेताओं के बीच विवाद हुआ था। बताया गया कि विधानसभा चुनाव के लिए प्रत्याशी चयन को लेकर दोनों जिलों के दावेदारों को बुलाया गया था। इसी दौरान नेताओं के बीच मतभेद सामने आए। इसके बाद पार्टी नेतृत्व ने दोनों जिलों की कार्यकारिणियों को भंग करने का फैसला लिया। लगातार हो रही इन कार्रवाइयों से साफ है कि समाजवादी पार्टी का शीर्ष नेतृत्व चुनाव से पहले संगठन में अनुशासन बनाए रखने पर जोर दे रहा है। पार्टी के लिए यह जरूरी है कि स्थानीय स्तर पर नेता आपसी विवादों से दूर रहकर चुनावी तैयारियों, जनसंपर्क और संगठन विस्तार पर ध्यान दें।

उत्तराखंड में भी संगठन का नए सिरे से गठन

उत्तराखंड में समाजवादी पार्टी ने संगठनात्मक बदलाव की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष अब्दुल मतीन सिद्दीकी ने राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देशों का हवाला देते हुए प्रदेश, जिला, महानगर और नगर स्तर की कार्यकारिणियों के साथ विभिन्न प्रकोष्ठों की मौजूदा इकाइयों को तत्काल प्रभाव से भंग करने की घोषणा की। प्रदेश अध्यक्ष ने राज्यभर में भ्रमण कर नए सिरे से संगठन खड़ा करने की बात कही है। इसका उद्देश्य पार्टी की सांगठनिक गतिविधियों को गति देना और विभिन्न स्तरों पर नई टीम तैयार करना बताया गया है।

2027 के चुनाव से पहले अखिलेश यादव की रणनीति

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को देखते हुए समाजवादी पार्टी के सामने लोकसभा चुनाव के प्रदर्शन को विधानसभा में दोहराने की चुनौती है। इसके लिए पार्टी को बूथ स्तर पर संगठन मजबूत करने, कार्यकर्ताओं को सक्रिय रखने और जनता के बीच अपनी राजनीतिक पकड़ बनाए रखने की जरूरत होगी। जिला इकाइयों को भंग करने के फैसले को इसी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, किसी संगठन को भंग करना अपने आप में चुनावी सफलता की गारंटी नहीं है। पार्टी के सामने अब नई कार्यकारिणियों का गठन करने, स्थानीय नेताओं के बीच तालमेल बढ़ाने और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं की भागीदारी सुनिश्चित करने की चुनौती होगी।

आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि समाजवादी पार्टी नए संगठनात्मक ढांचे के जरिए कितनी तेजी से चुनावी तैयारियों को आगे बढ़ाती है। फिलहाल, अखिलेश यादव के लगातार हो रहे इन फैसलों ने पार्टी के नेताओं और पदाधिकारियों को यह संकेत दे दिया है कि 2027 की चुनावी लड़ाई में संगठनात्मक सक्रियता और अनुशासन को प्राथमिकता दी जाएगी।

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