उजाला / देश
नई दिल्ली: दिल्ली में विरोध प्रदर्शन और पुलिस की कार्रवाई को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए मौजूदा हालात की तुलना जनरल डायर के दौर से की है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में ऐसा माहौल बनाया जा रहा है, जिसमें आम लोगों के अधिकारों और विरोध की आवाज को दबाया जा रहा है। सांसद ने दिल्ली में हजारों लोगों को हिरासत में लिए जाने का दावा करते हुए कहा कि देश को मौजूदा परिस्थितियों से मुक्ति दिलाने के लिए एक नई आजादी की जरूरत है।
‘जनरल डायर से बड़ा कुशासन हो गया है’
पप्पू यादव ने अपने बयान में कहा कि देश में जिस तरह का माहौल बन रहा है, वह बेहद चिंताजनक है। उन्होंने मौजूदा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा, ‘जनरल डायर से बड़ा कुशासन हो गया है।’ सांसद ने आरोप लगाया कि दिल्ली में डर का माहौल बनाया गया और आम लोगों के साथ ज्यादती की गई। यह बयान ऐसे समय आया है, जब दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। 10 अक्टूबर को प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले राजधानी के कई इलाकों में सुरक्षा बढ़ाई गई थी और बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिया गया। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में 7,000 से अधिक लोगों को हिरासत में लिए जाने की बात कही गई है।
जनता के अपमान पर जताई नाराजगी
सांसद ने कहा कि देश की जनता उनके लिए भगवान के समान है और जनता का अपमान करने वालों को माफ नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने विरोध करने वाले लोगों के लिए कथित तौर पर अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किए जाने पर भी नाराजगी जताई। पप्पू यादव ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भी निशाना साधा और उनके खिलाफ कड़ी टिप्पणी की। उनका कहना है कि लोकतंत्र में जनता की आवाज सुनना और नागरिकों के अधिकारों का सम्मान करना जरूरी है। हालांकि, उनके इन बयानों को राजनीतिक आरोपों के रूप में देखा जाना चाहिए।
राहुल और प्रियंका गांधी की तारीफ
अपने बयान में पप्पू यादव ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि दोनों नेता पिछले तीन वर्षों से सत्ता हासिल करने के लिए नहीं, बल्कि देश, संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं। दिल्ली में हाल के दिनों में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत विपक्षी नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त से जुड़े मुद्दों पर विरोध प्रदर्शन किया है। विपक्षी दलों ने मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाए हैं और चुनाव आयोग से जवाब मांगा है। प्रदर्शन के दौरान कई विपक्षी नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया था, हालांकि बाद में उन्हें छोड़ दिया गया।
‘1942 से भी बड़ी क्रांति’, युवाओं को लेकर किया दावा
पप्पू यादव ने अपने बयान में दावा किया कि देश में 1942 से भी बड़ी क्रांति की स्थिति बन रही है। उन्होंने कहा कि जेन-जी और जेन-अल्फा के युवा लोकतंत्र और अपने अधिकारों की रक्षा के लिए आगे आ रहे हैं। उनके मुताबिक, देश को ऐसी व्यवस्था की जरूरत है, जहां नागरिकों की आवाज सुनी जाए और संविधान के मूल्यों की रक्षा हो। सांसद ने कहा कि जनता को अपमानित करने और उसकी आवाज दबाने की कोशिशों को स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने मौजूदा हालात से मुक्ति के लिए नई आजादी की जरूरत पर जोर दिया।
दिल्ली प्रदर्शन से बढ़ा राजनीतिक टकराव
दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन और मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के बीच टकराव बढ़ा है। विपक्ष जहां चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग कर रहा है, वहीं सरकार और प्रशासन की ओर से प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया गया है। पप्पू यादव के बयान ने इस राजनीतिक विवाद को और तीखा कर दिया है। अब देखना होगा कि उनके आरोपों और विपक्ष की मांगों पर केंद्र सरकार तथा संबंधित संस्थाओं की ओर से क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।
